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  • nishabd_sharma 4h

    Mosme brsat me fiza ka rang nikhr hi jata hai,
    Chithi ka ana bhi uske ane ka sabab ban hi jata hai.

    Gule gulzar sa manzar ankho me dikh hi jata hai,
    Rubru ishq jab ho tho pyar a hi jata hai.

    Ye shetaniya hai ishq ki samajna mushkil nhi inko,
    Darakhto ki angan me hatho me jab hath ata hai.

    "निःशब्द"

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    शैतानिया

    मौसमे बरसात मे फ़िज़ा का रंग निखर ही जाता है,
    चिठ्ठी का आना भी उसके आने का सबब बन ही जाता है.

    गुले गुलज़ार सा मंज़र आँखों मे दिख ही जाता है,
    रूबरू इश्क़ जब हो तो प्यार आ ही जाता है.

    ये शैतानिया है इश्क़ की समझना मुश्किल नहीं इनको ,
    दरख्तों के आंगन मे हाथों मे जब हाथ आता है.

    "निःशब्द"

    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 1d

    उल्फ़त केसी हो, बिलकुल इश्क़ जैसी हो,
    ना टूटे ना रूठें बिलुक आसमान जैसी हो.


    "निःशब्द"

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    उल्फत

    महोब्बत का ये मरकज़ है यहाँ सजदे मे तुम रेहना,
    फ़िज़ा रंगी है, है उल्फत भी यहाँ तुम इश्क़ मे रेहना.

    तुम्हे पूछेगी ये दुन्या तुम्हारा हाल केसा है,
    पड़े हो इश्क़ मे जब से तुम्हारा भाल कैसे है.

    ये शोख़िया जो आँखों की इनमे डूबे जाते हो,
    बिना कश्ती के भवर को तुम कैसे तेर जाते हो,

    लगे हो आज भी तुम उल्फ़त को निभाने मे,
    ये केसा इश्क़ है जकड़े है तुमको मेय खाने मे.

    महोब्बत का ये मरकज़ है यहाँ सजदे मे तुम रेहना,
    फ़िज़ा रंगी है, है उल्फत भी यहाँ तुम इश्क़ मे रेहना.

    "निःशब्द"

    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 2d

    Wapsi ho gyi akhir

    "निःशब्द"

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    तस्वीर

    जब भी थोड़ी देर की उदासी छाती हैं,
    में तेरे उन ख्यालों का जाम पी लेता हूं.

    यूं शराबी नहीं हूं मुझे शराबी मत समझना,
    दिल मे जो तेरी तस्वीर बोसीदा है
    उसे साकी समझ लेता हूं.

    "निःशब्द"

    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 2w

    पेशानी = माथा


    जिस आईने में ख़ुद को देखता था कब टूट गया पता ही नहीं चला,
    पता ही नहीं चला कि वो आईना मेरा था ही नहीं,
    पता ही नहीं चला कि वो आईना जिसमें... जिसमें में रोज़ खुद को देखो कब ख़ुद मेरे ख़ुद के हाथों से छूट गया ... पता ही नहीं चला.

    अजब खेल हैं इस आईने के भी हर रंग के लोगो के लिऐ आईना ... आईना ही रहता हैं शक्ल ... शक्ल ही रहती हैं.
    यहां सिर्फ किरदार बदलते हैं आईना ... आईना ही रहता हैं.
    ज़िन्दगी भी ऐसी ही हैं
    आईने जैसे साफ तो नहीं पर कुछ कुछ आईने जैसी ही हैं.

    "में राहू या ना राहू , तुम मुझ में कहीं बाकी रहना,
    मुझे नींद आए जो आखरी , तुम ख्वाबों में आते रहना.


    "निःशब्द"

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    आईना

    नज़रे जो गयी पेशानी पर उसकी , हाल-ऐ-दिल सारा बयां हो गया,
    उस रोज़ हमने सच्चाई का हमदर्द वो बेईमान आईना ही तोड़ दिया.

    "निःशब्द"


    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 2w

    Muntzir = intezaar karraha ,is to be waiting for
    Mutmin = संतुष्ट , satisfied


    Mutmin ishq me useke,gor se kahal ko dekha raha,
    Bagawato ne dastak esi di, barishoo ne khasara kar diya.

    Sohbat ko uski bigada mene kud hi,
    Muntzir tufano ka, kahamos hawo ko
    dekhta reh gya.

    Muntzir = intezaar karraha ,is to be waiting for
    Mutmin = संतुष्ट , satisfied

    "निःशब्द"

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    सोहबत

    मुत्तमईन इश्क़ मे उसके, गोर से आसमानो को देखता रहा.
    बागवतो ने दी ऐसी दस्तक ,बारिशो ने ख़सारा कर दिया.

    सोहबत को उसकी बिगड़ा मेने ख़ुद ही,
    मुन्तज़िर तुफानो का, खामोश हवाओ को देख्ता रेह गया.

    "निःशब्द"

    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 2w

    Ajj tak samaj nhi paya wo thi bhi , ya nhi thi , ya hai bhi.
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    Bas fir kya tha socha ajj usi ko likh dalo, mulakat rubru na shi kalam ke jazbaato se hi karwao.


    "निःशब्द"

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    कोन थी वो

    वो कोन थी वो जो खवाबों में आ कर मेरी नींद मे खलल डाला करती,
    कभी माथे तो कभी मेरे हाथों को चूमा करती.

    कभी हसरत से तो कभी अन्जानी उम्मीदू से देखा करती,
    अनदाज़ उसका बाखुदा कमाल था झरोखा उसकी आँखों का बेमिसाल था.

    हलकी सी लबकुशाई मेरे कानों में होती,
    वो नगमों का सिलसिला भी कया कमाल था.

    न खुद सोती न मुझे सोने देती,
    उस के चेहरे में कया गज़ब का जमाल था.

    खेर करवटों में सारी रात गुज़र जाती ,
    सुबहों को उठते ही मेरे ज़ेहन में यही सवाल था.

    वो कोन थी जो खवाबों में आ कर मेरी नींद मे खलल डाला करती,
    कभी माथे तो कभी मेरे हाथों को चूमा करती.


    "निःशब्द"


    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 2w

    Beshak tum muje ruswa krna, faqir krna,
    Bas ek mehar krna, kafan mera na udhar karna

    "निःशब्द"

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    कफन

    बेशक तुम मुझे रूसवा करना, फकीर करना,
    बस एक मेहर करना, कफन मेरा न उधार करना.

    "निःशब्द"

    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 3w

    "निःशब्द"

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    हक़ीक़त

    ख्वाब कुछ और थे, हक़ीक़त कुछ और,
    मर्ज़ कुछ और था, थी दवा कुछ और.

    नींद से उठ पाता, दुपेहर डल चुकी थी,
    आँखों का मलना और था,आंसू पोंछना कुछ और.

    "निःशब्द"

    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 3w

    खलिक/khalik = creator

    Bath serf itni si hai ki husan ki tarif me kya likhe,
    agr husan ki tarif kar bhi di tho us khalik
    (us husan ko banne wala/us husan ko janam dene wali maa) us ki tarif me kya likhe
    Is kyanat ke husan ko banane wale ki tarif me kya likhe,
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    ."निःशब्द"

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    तारीफ-ऐ-हुस्न

    लब-ओ-लबाब बस इतना सा हैं कि तारीफ-ऐ-हुस्न क्या
    लिखें,

    गर तारीफ-ऐ-हुस्न कर भी दे, तो तारीफ-ऐ-खलिक क्या
    लिखें.


    "निःशब्द"


    ©nishabd_sharma

  • nishabd_sharma 3w

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    "दैर नहीं, हरम नहीं, दर नहीं, आस्ताँ नहीं,

    बैठे हैं रहगुज़र पे हम, ग़ैर हमें उठाए क्यूँ."
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    "निःशब्द"

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    मुसाफ़िर

    "किराएदार हूँ" तेरे शहर का,इन मौसम से "बे-वाकिफ़"नहीं हूँ,
    "मुसाफ़िर" हूँ तेरी "रहगुज़र" का, इन बेजान दीवारों का "कायल" नहीं हूँ.


    "निःशब्द"


    ©nishabd_sharma