Grid View
List View
  • nishkumar 15w

    एक तरफ तीन नदियों का संगम
    और एक तरफ सालो की दोस्ती का बंधन

    #7yearsofSangam

  • nishkumar 34w

    खाली सन्नाटे में चिल्ला के देखा है।
    अपने दुःख दर्द को बाट के देखा है।
    गहरा है हर एक जख्म तेरा, ऐ ज़िंदगी।
    क्या तुने ये कभी इंसानो से पुछ के देखा है।

    निशांत कुमार
    ©nishkumar

  • nishkumar 36w

    जिंदगी के सवालो से अच्छे तो,
    ये गणित के सवाल लगते है मुझे
    कम से कम सुलझ तो जाते है।

    निशांत कुमार
    ©nishkumar

  • nishkumar 36w

    बहुत परेशान रहता हु आजकल, मुझे अकेला छोड़ दो
    मेरे बस की बात नही, हो सके तो अपनी राहे मोड़ दो

    निशांत कुमार
    ©nishkumar

  • nishkumar 37w

    कुछ वक़्त उधार रह गया है, मेरा तुम्हारे पास।
    खैर छोड़ो, शायद घड़ी बदलना आदत थी तुम्हारी।

    निशांत कुमार
    ©nishkumar

  • nishkumar 38w

    रास्ता वीरान था, मगर हम चलते गए।
    मौसम में तूफ़ान था, मगर हम बढ़ते गए।
    ना जाने कितने करीबी मुझसे इस रास्ते में बिछड़ गए।
    एक उम्मीद थी, बस उसी को पकड़ कर चलते गए।
    अचानक से बीच राह में, अपनी मंजिल से भटक गए।
    ऐसा लगा की जिंदगी में आगे चलते चलते, कही अटक गए।
    अपने सपनो और इच्छाओ को पूरा करने के लिए जीते गए।
    दुःख का दर्द भी, हम अपना गला घोट कर पीते गए।
    ये जिंदगी का रास्ता है, और हम कुछ न कुछ इससे सीखते गए।

    निशांत कुमार
    ©nishkumar

  • nishkumar 38w

    मैं हु मजबूर
    क्योंकि मैं हु एक मजदूर
    रोटी कपड़ा मकान इन सब से दूर
    ऐसा क्या है मेरा कसूर?
    जो दुनिया मुझे ही करती है नामंजूर
    अपनी हवेली से बाहर तो निकलिए ऐ हुज़ूर
    के हर एक मजदूर
    आज है मजबूर

    निशांत कुमार
    ©nishkumar

  • nishkumar 46w

    घर से विस्थापन

    एक सवाल है जो रोज़ खुद से पूछता हूं।

    छोड़ आये या छुट गई वो गलियां ??
    जहा बस्ती थी हम सभी की खुशियां।

    निशांत कुमार।
    ©nishkumar

  • nishkumar 53w

    We all have fire inbuilt, but somehow we all are looking for that person to ignite it.

    Nishant kumar
    ©nishkumar

  • nishkumar 56w

    कुछ रिश्तो की डोर टुट गई है।
    उन्हें जोड़ने की वजह ढूंढ रहा हु।
    न जाने वो कौनसी रंजिशें है।
    जिन्हें सोचकर अपनी आँखें मूंद रहा हु।

    निशांत कुमार
    ©nishkumar