philosophic_firefly

O my darling! sing! ding ding ding! ❤

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  • philosophic_firefly 2d

    और फिर उन्हें भुला दिया जाता है किसी झूठ की तरह, किसी ख्वाब की तरह...
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  • philosophic_firefly 3d

    दर बदर भटकने वाला शख्स
    उसके दर पर ही भटकता रह गया..
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  • philosophic_firefly 3d

    मुझे मुश्किलों पर पूरा भरोसा है
    कभी तो दगा देंगी तुम्हारी तरह..
    कभी तो भुला देंगी तुम्हारी तरह..
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  • philosophic_firefly 3d

    उड़ने लगी हूं किसी तितली की तरह
    चहकने लगी हूं किसी चिड़िया की तरह
    बंद सांसों में महसूस कर के ज़िन्दगी
    खुल गई हूं बंद किताब के खास पन्ने की तरह
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  • philosophic_firefly 3d

    एक अरसे से तुमको देखा नहीं
    एक अरसे से तुम भी आए नहीं
    एक अरसे से दिल टूटा हुआ हुआ है
    और तुम भी दिल जोड़ने आए नहीं।
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  • philosophic_firefly 3d

    मेरी ज़िन्दगी बिल्कुल खाली है मेरी जान
    आओ! तकलीफों से भर दो फिर से एक बार..
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  • philosophic_firefly 3d

    कुछ ख्वाब ज़िन्दगी कैद कर लेती है
    कुछ ख्वाबों को मुकम्मल करने के लिए..
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  • philosophic_firefly 2w

    प्रेम प्रश्न

    प्रिय! देखो..
    प्रेमी नष्ट हो रहे है।
    और वो गुलाब..
    वो सूखे जा रहे है,
    अब बताओ इस समस्या का हल!

    भंते, पुष्पों की क्या आवश्यकता..
    प्रेम तो स्वयं पुष्प है।
    प्रेमियों का नाश होना एक समस्या है!
    इसका हल हम अवश्य निकलेंगे।

    जाओ, और मल्लिका को बुला लाओ
    उससे कहना की प्रश्न पूछने हैं।

    (मल्लिका का आगमन)

    हे स्वामी! प्रणाम..
    देवी का मस्तक आपके प्रश्नों के चरणों में..!

    बैठो मल्लिका! और सुनो।
    मेरी प्रिय पत्नी प्रेम की भावना को जानना चाहती है
    उसे प्रेम की अभिव्यक्ति से अवगत कराओ।

    स्वामी! प्रेम भावों का ऐसा अमृत हैं
    जो शब्दों से परे है,
    प्रेम की अभिलाषा ही मनुष्य को पावन बनाती है
    परन्तु, देवी! यह प्रेम अपने रूप में न होकर
    निराकार है।

    लेकिन इसका अर्थ कदापि नहीं
    की शारीरिक भोग ही प्रेम है।
    नहीं प्रिय! प्रेम सर्वोच्च भाव है
    यह शरीर की मलिना त्वचा से परे है।

    प्रेम तो आत्मा है
    आत्मा तो अदृश्य है
    अदृश्य को दृश्य में न मिलाओ,
    भ्रांति उत्पन्न होती है!

    स्वामी अब मैं चलती हूं
    मेरे समय समाप्त हुआ।
    मुझे आज्ञा दे।

    (मल्लिका जाती है)

    सुना प्रिय, यही है इसका उत्तर
    प्रेम को लोग दृश्य समझ रहे है, त्वचा में ढूंढ रहे है
    यही कारण है कि प्रेमी नष्ट हो रहे है।

    (पत्नी ने पूछा)

    प्रिय, स्वामी! अपरिहार्य प्रेम और मृत्यु के पश्चात
    किसे प्रेम करना चाहिए?

    भंते, सत्य से किया गया प्रेम ही
    अपरिहार्य और अनंत परमानंद देता है,
    अन्य सब कुछ माया है।

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  • philosophic_firefly 2w

    ..और फिर कुछ ऐसा हुआ जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
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  • philosophic_firefly 2w

    हवाएं चलती रही
    मौसम बदलते रहे
    मैं सुनती रही
    तुम कहते रहे
    इंतजार होता रहा
    हम करते गए
    तुम आने वाले थे
    बस आते रह गए...
    ©philosophic_firefly