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  • poetry_of_sjt 11w

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  • poetry_of_sjt 19w

    ख़ामोश हूं आज कल वक़्त सब कुछ कह रहा है ,
    कुछ उलझने हैं उदासी है मन सब कुछ सह रहा है ,

    चला जो खाली राहों में जुगनुओं के सहारे हो कर ,
    अंधेरों का खौफ लिए तूफान अब कुछ बढ़ रहा है ,

    सन्नाटे ने एक सदी से मेरे मन में हल चल किए है ,
    खामोशी का एक नशा मुझे अब कुछ चढ़ रहा है ,

    कुछ मुश्किलों ने फतह हासिल कि है ज़िन्दगी में ,
    पर डर का घर धीरे धीरे सही अब कुछ ढह रहा है ,

    तमाम कोशिशों के बावजूद बिखरा नहीं पाया वो ,
    हौसलों का समंदर पास मेरे अब कुछ बह रहा है ,

    माना वक़्त के घेरे ने वक़्त में वक़्त से घेर लिया ,
    पर एक वक़्त है जो हर वक़्त अब कुछ कह रहा है ,

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    ©poetry_of_sjt

  • poetry_of_sjt 19w

    ख़ामोश हूं आज कल वक़्त सब कुछ कह रहा है ,
    कुछ उलझने हैं उदासी है मन सब कुछ सह रहा है ,

    चला जो खाली राहों में जुगनुओं के सहारे हो कर ,
    अंधेरों का खौफ लिए तूफान अब कुछ बढ़ रहा है ,

    सन्नाटे ने एक सदी से मेरे मन में हल चल किए है ,
    खामोशी का एक नशा मुझे अब कुछ चढ़ रहा है ,

    कुछ मुश्किलों ने फतह हासिल कि है ज़िन्दगी में ,
    पर डर का घर धीरे धीरे सही अब कुछ ढह रहा है ,

    तमाम कोशिशों के बावजूद बिखरा नहीं पाया वो ,
    हौसलों का समंदर पास मेरे अब कुछ बह रहा है ,

    माना वक़्त के घेरे ने वक़्त में वक़्त से घेर लिया ,
    पर एक वक़्त है जो हर वक़्त अब कुछ कह रहा है ,

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    ©poetry_of_sjt

  • poetry_of_sjt 25w

    ।। कुछ पंक्तियां *मां* पर ।।

    ��अपने विचार रखने का, छोटा सा प्रयास��

    मां की ममता गुणगान हेतु ,
    मैं शब्द कहां से लाऊंगा ,
    जितना मां ने है त्याग किया ,
    मैं इसे बता न पाऊंगा ,

    ख़ुद भूखी रहकर दिया निवाला ,
    हंस हंस के ही खिलाती है ,
    अन्दर अन्दर ही ख़ुद रो लेती है ,
    बाहर न कभी जताती है ,

    ख़ुद दुखों का सागर पी कर ,
    हंसकर खूब हंसाती है ,
    तेरे दूध का कर्ज कभी भी ,
    मां मैं चुका न पाऊंगा ,
    जितना मां ने है त्याग किया ,
    मैं इसे बता न पाऊंगा ,

    याद करो जब छोटे थे हम ,
    किसी और गोद न जाते थे ,
    जबरजस्ती गर लिया किसी ने ,
    फिर रो रोकर चिल्लाते थे ,

    पर मां के आंचल में छिपकर ,
    मंद मंद मुस्काते थे ,
    मां की बाहों का स्नेह याद है ,
    हरगिज़ भुला न पाऊंगा ,
    जितना मां ने है त्याग किया ,
    मैं इसे बता न पाऊंगा ,

    पुत्र पुत्री हैं एक बराबर ,
    दोनों ही तो संतान है ,
    भेद नहीं होने देती है ,
    इसी लिए मां महान है ,

    जीवन में पहली गुरु है मां ,
    और मां ही तो भगवान है ,
    अगर दुखाऊं भूले से दिल ,
    तो मैं पुण्य कमा न पाऊंगा ,
    जितना मां ने है त्याग किया ,
    मैं इसे बता न पाऊंगा ,

    देती है वो दुआ हमेशा ,
    नाराज़ कभी नहीं होती है ,
    सर पर यदि वो रखे हांथ तो ,
    मुश्किल ख़ुद हल हो जाती है ,

    और यदि मांथा को चूमे तो ,
    सोई किस्मत जग जाती है ,
    यदि मां की जो बात न मानी ,
    जीवन भर मैं पछताऊंगा ,
    जितना मां ने है त्याग किया ,
    मैं इसे बता न पाऊंगा ,

    इस लिए निवेदन करता हूं मैं ,
    ममता की दौलत ले लो ,
    मां के चरणों की धूल लगाकर ,
    इज्जत और शोहरत पा लो ,

    चारों धाम है चरण में इसके ,
    मुक्ति का तुम दर पा लो ,
    चरण शरण में रहा अगर तो ,
    मैं धन्य अमर हो जाऊंगा ,
    जितना मां ने है त्याग किया ,
    मैं इसे बता न पाऊंगा ,

    कहने को तो बहुत कुछ है ,
    अभी इतना ही कह पाऊंगा ,
    बहुत जल्द ही इससे अच्छा ,
    लिखकर के मैं सुनाऊंगा ,
    अगर भूल हो गई हो मुझसे ,
    तो क्षमा दान मैं चाहूंगा ,
    जितना मां ने है त्याग किया ,
    मैं इसे बता न पाऊंगा ,
    .
    .#qoutes #worldwriters #quotes #poetryofsjt #hindi #urdu #english #shayari #love #lovequotes #lifequotes #sadqoutes #alonequotes #poetry #yqdidi #mirakee #nojoto #pratilipi #yourquote #writer #writersofinstagram #writerofindia #igwriters #qoute #stories #maharashtra #mumbai

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    मां

    ©poetry_of_sjt

  • poetry_of_sjt 28w

    Birthday

    आज तुम्हारा जन्म दिवस है ,
    क्या उपहार तुम्हें भेजूं ,
    क्या उन बीते संग पल की ,
    यादों का हार तुम्हें भेजूं ,

    यूं तो तुम सबसे अलग हो ,
    कोई न तुम जैसा हो पाया ,
    यही वजह है की अब तक ,
    मैं तुमसे अलग न हो पाया ,

    सिर्फ़ एक बार मुलाक़ात हुई ,
    तब जीवन में अकेली रात हुई ,
    वो रात मेरे हसीं रातों में से है ,
    लब खामोश नयनों से बात हुई ,

    हजार बंदिशों के बाद भी तुमने ,
    कभी न प्यार कम होने दिया ,
    लड़ती रही ख़ुद तूफानों से ,
    मुझको न कोई ग़म होने दिया ,

    अरे! भूल गया बातों ही बातों में,
    जन्म दिवस है आज तुम्हारा ,
    पर मुमकिन नहीं है साथ रहूं मैं ,
    ख़ुश हूं न जाने कोई राज़ तुम्हारा ,

    बस प्यार प्रिए इन शब्दों से ही ,
    अंतर मन तक जाना चाहूंगा ,
    उपहार तुम्हारा उसी जगह पर ,
    देकर फ़िर वापस आना चाहूंगा ,

    ©poetry_of_sjt

  • poetry_of_sjt 28w

    कुछ ऐसे भी हैं

    बहुत मतलबी हो गए कुछ लोग यहां ,
    ना हो मतलब तो मतलब नहीं रखते ,
    करो लाख एहसान हो जाए एक गलती ,
    भूल जाते हैं याद फिर तब नहीं रखते ,

    हर चीज़ में वो अपना दिमाग़ लगाते हैं ,
    पर अपनी खुद्दारी यहां सब नहीं रखते ,
    हमेशा दो कौड़ी की सोच रखने वाले ये ,
    भरोसा ख़ुद पर बिल्कुल जब नहीं रखते ,

    यूं तो अक्सर पीठ पीछे ही वार करते हैं ,
    सामने बोल देने की औकात नहीं रखते ,
    कुत्तों की झुंड में ही भोकते रहते हैं पर ,
    ख़ुद की कही बात की बात नहीं रखते ,

    छोड़ो ऐसे लोगों पर ध्यान नहीं देना मुझे ,
    जो अपने भीतर कोई जज़्बात नहीं रखते ,
    जो जैसा करेगा , वो अपना अपना भरेगा ,
    हम ऐसे लोगों से ताल्लुकात नहीं रखते ,

    ©poetry_of_sjt

  • poetry_of_sjt 30w

    सारे शहर का माहौल खामोशियों में बदल गया है ,
    माहामारी ऐसी फैली है सारा नज़ारा बदल गया है ,
    अफरातफरी है चारों दिशाओं में इस दुनिया के ,
    कुछ वक़्त लगा पर अब हर इंसान सम्भल गया है ,

    बेशक परेशानियां हो रहीं हैं ऐसे फैसलों से यहां ,
    पर यकीन मानिए सुरक्षित हैं ऐसे फासलों से यहां ,
    यही वक़्त है क्रूर वक़्त को औकात दिखा देने का ,
    ये भारतवर्ष है सब साथ चले हम काफिलों से यहां ,

    #covid19 #coronavirus #poetryofsjt #india #lockdown #yqbaba #yqdidi #poetry

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  • poetry_of_sjt 32w

    #दाग_हूं_मैं____By___SJT

    दाग़ मुझमें थे और मैं कपड़े बदलता रहा,
    आग उनमें ही थी पर मैं यूं ही जलता रहा,

    कई दफा ख़ुद को बदलना चाहा मैनें,
    पर ऐब इतने थे मुझमें कि मैं मरता रहा,

    रंजिश ए ज़िन्दगी में उतर गई इस कदर,
    सौदा अपनी सांसों का मौत से करता रहा,

    ज़गमगाते जुगनुओं ने रास्ता दिखाया तो,
    एक भयानक तूफान मेरी तरफ बढ़ता रहा,

    मेरी ही कश्ती के कुछ मुसाफिरों ने मुझे,
    बार बार गिराया पर हर बार मैं चढ़ता रहा,

    कुछ हमदर्द बनकर आए सुलाने के वास्ते,
    वो सोते रहे बेख़ौफ़ होकर मैं जगता रहा,

    ज़िन्दगी के सफ़र में बहुत हमसफ़र मिले ,
    उतर गए अपने स्टेशनों में पर मैं चलता रहा,

    इक अधूरी आश लिए की पूरी हो जाए अब,
    इसलिए ज़मीं के ख़ुदाओं के घर भटकता रहा, #life #love #poetry #thoughts

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    ©poetry_of_sjt

  • poetry_of_sjt 33w

    यादों के सफ़र में तो ,
    कारवां का मकान आया ,
    मंज़िल तो मिली ही नहीं ,
    वापस थका थकान आया ,
    बिछुड़ गए हैं वो हमसे ,
    शायद हो अब मिल पना ,

    तुम आई हो ठहर जाना ,
    नहीं अब छोड़कर जाना ,

    गुजरे हैं हसीं पल जो ,
    हमेशा याद आएंगे ,
    मुकम्मल तो नहीं फिर भी ,
    संग तेरे ही आएंगे ,
    बहारें तब ये देखेंगी ,
    मोहब्बत का सफ़रनामा ,

    तुम आई हो ठहर जाना ,
    नहीं अब छोड़कर जाना ,

    बादल सा मैं बरसा हूं ,
    मगर मिलने को तरसा हूं ,
    जैसे तुम ने छोड़ा था ,
    ठहरा हुआ मैं जल सा हूं
    मैं दरिया हूं रेत का पर ,
    मगर अब चाहूं घुल जाना ,

    तुम आई हो ठहर जाना ,
    नहीं अब छोड़कर जाना ,


    तुम्हें अक्सर शिक़ायत थी ,
    मैं तुमसे दूर जाता हूं ,
    तुमने न वजह जानी ,
    मैं ख़ुद को तन्हा पाता हूं ,
    मगर अब जान लो तुम भी ,
    न रह जाए फ़िर पछताना ,

    तुम आई हो ठहर जाना ,
    नहीं अब छोड़कर जाना ,

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  • poetry_of_sjt 34w

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