• badnaam_shayar 23w

    तुम

    कहीं गुम था मैं , कहीं गुम थी वो।
    रात से भी ज्यादा, गुमसुम थी वो।
    सपने क्या गज़ब के थे उस रात के क्या कहें!
    आंख जो खुला तो सामने पे भी तुम थी वो।

    कातिलाना आंखें थी,फिर ‌‌‌‌भी मासूम थी वो।
    फुलो की तरह खिलता जो तबस्सुम थी वो।
    मैं सोचता था‌ कि चांद हो या हो, वो कुसूम!
    कुछ दूर जाके देखा तो सचमें यारा तुम थी वो।

    ✍️ naarenSingh