• pankajsingh22 23w

    टूटे

    क्या आलम था वो जब आपको पहली बार देखा था,
    आपको अपना बनाने की हर कोशिशो में अपने प्राण फेका था,
    पर आप न मिल पाए,
    वो बिखरे हुए ख्वाब न फिर खिल पाए ,
    अब तो हम बस अपने उन नज़रो से लूटे है,
    हम न आपके कभी बन सके,
    अपनी ज़िंदगी से ही हम टूटे है।

    आपका वो हँसना हमे याद है,
    और आपके कुछ बातों से आज भी हमे फरियाद है,
    वो जो आप हमें दिन भर उन बातों से सताते थे,
    और कुछ बातों में सारी खुशियाँ दे जाते थे,
    अब आप बात नही करते इसी लिए रूठे है,
    किस्मत समझता था आपको, क्या बताए
    अपने ज़िन्दगी से ही हम टूटे है।

    ज़रा बता देते हम पसन्द न थे तो आपको,
    या उन बातों से हटा देते,
    उसी समय मैं आपसे दूर हो जाता,
    या फिर मौत के पास जरूर हो जाता,
    अब हम अंदर ही अंदर घुटन के सांस से घुटे है,
    ज़रा इक़तला करा देते मेरे गलत फहमिओ से, सुधार लेते उनको क्योंकिअब हम बस
    अपनी ज़िंदगी से ही हम टूटे है।


    ©pankajsingh22