• bunny_22oct2017 22w

    एक खत जिंदगी को ।

    जब तूने जंजीरों में जकड़ा होगा
    खुशियों को कसकर पकड़ा होगा
    सोचा क्या, तेरे लोहे से डर जाएगा
    जुनून है मेरा यूंही नहीं मर जाएगा

    माना तबाही से तेरी अन्जान हूं मैं
    पर आने वाला ठहरा तूफान हूं मैं
    सोचा क्या, तेरी हवा से डर जाएगा
    जुनून है मेरा यूंही नहीं मर जाएगा

    सूरज ने तेरे ये कैसा सिला दिया
    परछाईं को भी मेरी जला दिया
    सोचा क्या, तेरी आग से डर जाएगा
    जुनून है मेरा यूंही नहीं मर जाएगा

    आ बैठ कभी मुझसे बात भी कर
    जरा छोटी अपनी औकात भी कर
    होगी सुलह , कोई निष्कर्ष निकल के आएगा
    फिर जो जुनून है मेरा यूंही नहीं व्यर्थ जाएगा


    - शाश्वत