• aadarshhh 10w

    विधान हूँ मैं ज्ञान का,
    ना दूत मैं अभिमान का,
    तुम मानसिक वेदना ना करो,
    भंडार हूँ मैं शास्त्र का।

    प्रिय हूँ महाकाल का,
    ज्ञाता हूँ अस्त्र-शास्त्र का,
    तुम भंग मत करो मेरा ध्यान,
    मैं भक्त हूँ परशुराम का।

    विधाता हूँ ब्रह्माण्ड का,
    भाग हूँ हर कांड का,
    तुम पाठ ना पढ़ाओ मुझे धैर्य का,
    मैं हूँ अंश प्रचंड का।

    मान ना शान का,
    तुम्हें पाठ पढ़ाऊँ मैं सम्मान का,
    तुम मत बनो अहिंसक,
    मैं भगवा हूँ परिधान का।

    -आदर्श जोशी
    ©aadarshhh