• vibhavbedard 30w

    मेरी सोच

    मैं तो हर किसी को दिल से यूं ही अपनाता रहा,
    उनके दर्द में रोता और खुशी में मुस्कुराता रहा।
    लोग अपने मतलब के लिए मुझे आजमाते रहे,
    और मैं बेवजह ही हर किसी के काम आता रहा।।
    (विभव बेदर्द)
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