• pragyat_01 5w

    @govinda_bag @mirakeeworld @lazybongness @hima_writes @anubhooti__
    मैं आप सभी लोगों को बताना चाहूंगा कि ये शब्द मैंने अपने सोसायटी में आने वाले सफाईकर्मी से कहे,क्योंकि उसकी एक आदत थी वो लोगों को हर वक्त नमस्ते अधिक करता था,लेकिन अपने काम के प्रति हमेशा लापरवाही, तो मैंने उसे कई बार टोका लेकिन वो हां में जवाब देता,फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आता,तो आज सुबह में ही श्रीमान जी हमसे टकरा गए और पीछे से बोल दिए नमस्कार भैया,
    तो हम तपाक से बोल उठे अरे महोदय कभी अपने कार्य को भी नमस्कार कर लिया करिये,और ऐसा कार्य जो आपकी आजीविका का साधन भी है,मेरी बातों को समझने का प्रयास करिये, आगे रब जाने कितना फर्क पड़ा होगा उन पर,
    हम भारतवासी कितने सफाई पसन्द हैं ये सभी लोग खुद से पूछ सकते हैं,घर शायद साफ सुथरा रखतें हों किंतु गली मोहल्ले, काफी विचारणीय है, है न?��
    हम लोग सिर्फ सिंधु घाटी सभ्यता को पढ़ कर गर्व कर सकते हैं, और लोगों को आये दिन बताते भी रहते हैं- भारत की हज़ारों साल पुरानी सिंधु सभ्यता,किंतु क्या हम इस गर्व के मर्म को समझे पूरी तरह से, या सिर्फ आज तक झूठ में ही जी रहे हैं��
    समझना होगा लोगों को,इंदौर की भांति हर शहर को सभ्यता की जद में लाना होगा����

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    व्यक्ति व्यवहारशील हो,

    या ना हो,

    किंतु कर्मशील अवश्य,

    होना चाहिये,

    क्योंकि, उसका कर्मशील

    जीवन ही

    उसके व्यवहार का परिचय

    बनता है!

    ~प्रज्ञात