• shubham510 78w

    एक ख्वाहिश

    जिंदगी किस मुकाम पर है समझ नहीं आ रहा,
    जाना किधर है, रास्ता कुछ नजर नहीं आ रहा,
    काश कोई होता जो कहता मेरा हाथ थाम कर,
    तू चल बेफिक्र, मैं इधर ही हूँ तेरा साथ बन कर।
    ©shubham510