• richirich38 5w

    याद और तुम

    बहुत याद आते हो तुम
    मेरे पास है क्या? ये दूरी, तुम्हारी यादें और कुछ तस्वीरें जो आडे़ तिरछे मुँह बनाकर भेजते हो तुम| बहुत याद आते हो तुम|
    जिंदगी की इस दौड़ मे न सुकून के पल हैं,
    न प्यार न साथ| बस है तो सिर्फ वो अहसास जो मुझे तुमसे इतनी दूर होकर भी जोडे़ रखता है|
    दुनिया को लगता है कि मै जिंदगी को भरपूर जी रही हूँ|
    पर क्या सांसे लेकर दिन के पहर यूं ही भागते हुए बिताने, रात को करवटे लेने के बाद भी न सो पाने को जीना कहते हो तुम??
    सच कहूं बहुत याद आते हो तुम|
    सुबह-ओ-शाम लोगो की बातों को बेख्याली से सुनती हूँ, शायद इसीलिये कुछ याद नही रहता|
    याद रहता है तो सिर्फ ये कि मेरी आत्मा का इक हिस्सा मुझसे दूर है,,
    और इस याद मे वो हिस्सा लिए कहीं दूर नजर आते हो तुम||
    बहुत,बहुत याद आते हो तुम|
    कब मेरी रुह अपने उस टुकड़े से मिलने के लिए इस भौतिकता को छोड़कर पहुँच जाती है तुम्हारे पास और पा लेना चाहती है उस अंश के साथ तुम्हे भी,,,,
    ये पता उस वक्त चलता है जब आंखे भींग जाती हैं और आवाज रुंध जाती है|
    तब लगता है शायद अभी अभी मेरी रुह को छूकर गुजरे हो तुम|
    कैसे समझाऊं सबको कि कितने याद आते हो तुम
    ©richirich38