• _jiya_ 15w

    कभी थोड़ी मायुसी, कभी अत्यंत प्यार,
    कभी पूरी रात बातें, और कभी एक लफ्ज़ भी नहीं,
    कभी वोह मैगी वाला मूड, तो कभी सेक्सी वाला,
    वोह रात के 1:30 बजे वाली फीलिंग भी ना, आजीब है।
    कभी 3 किताबें एक बार में पढ़ जाना, तो कभी एक पन्ने पर ही सो जाना,
    कभी कभी तारों को निहारना, तो कभी चल रहे पंखे को घूरना,
    कभी घर में किसी भूत की तरह टहलना, तो कभी कुम्भकरण की तरह सोना,
    वोह रात के 1:30 बजे वाली फीलिंग भी ना, अजीब है।
    कभी गानों में खो जाना, तो कभी खुद गुलज़ार बन जाना,
    कभी अरिजित को गले लगाना, तो कभी लता दीदी की गोद में सो जाना,
    कभी पुराने किस्से उधेड़ना, तो कभी नई यादों को समेटना,
    वोह रात के 1:30 बजे वाली फीलिंग भी ना, अजीब है।
    कभी इर्र्फान की आंखें, तो कभी शम्मी कपूर का डांस,
    कभी पारो की चिट्ठियों को उलट-पुलट लेना तो कभी फैज़ल का बदला लेना,
    कभी रात भर सुबह का इंतज़ार, तो कभी उसी रात में घुम हो जाने का खयाल,
    वोह रात के 1:30 बजे वाली फीलिंग भी ना, अजीब है।

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    वोह रात के 1:30 बजे वाली फीलिंग

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