• myaveragemusings 30w

    ~मैं और माँ~

    कहने को थी वो सबसे अलग
    करने को वो थी सबसे जुदा
    वो कहते हैं हूँ मैं उनकी तरह
    जिससे ज़माना पूरा हिला!

    मकान को इक घर बनाया
    प्यार से कौड़ी-कौड़ी जोड़ के
    जो खुद न हासिल किया
    हमें कराया, अपने निवाले छोड़ के

    कहते हैं सब बार-बार
    आपकी ही छवि हूं मैं
    काश ज़रा सी कभी बन भी पाऊँ
    माँ मैं भी तुम्हारी तरह

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