• poetrylust_ 6w

    चले तो गए
    मुसाफिरों की तरह
    ज़रा सोच लिए होते
    हम रहियों की तरह
    युं तो अब हवाओं में तुम नहीं
    तुम्हारा इत्र गले लगाता है
    वो राहें तुम्हारे कदमों का पता पूछती है
    वो बातें तुम्हारे नाम का जिक्र ढूंढ़ती है
    ज़रा सोच लिए होते
    हम राहियों की तरह
    चले तो गए शहर छोड़
    मुसाफिरों की तरह.
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