• rjmanjeri 70w

    राज़

    रोज़ यहाँ आते हो
    आंख क्यूँ चुराते हो
    राज़ हमसे छिपाते हो
    ये नही जानते हो
    हमे नही पहचानते हो
    हम राज़ वो जानते हैं
    बात तेरी मानते हैं
    तुम्हें पहचानते हैं
    आंख कुछ बता रही
    नीर क्यूँ बहा रही
    दिल को बहला रही
    क्यूँ ग़म को छुपाते हो
    यूँही मुस्कुराते हो
    क्यूँ बेगाना बनाते हो
    झुकी नज़र कह रही है
    मुझसे ही तो प्यार है
    फिर क्यों इनकार है
    रोज़ यहां....
    आंख क्यूँ...
    ©Rj Manjeri