• poetvinodvidrohi 51w

    इंसानियत के जल में जहर मजहब का घोल दिया।
    कुर्सी की खातिर धर्म को देश से ऊपर तोल दिया।
    वतन की छांव में कैसे ये सपोले बार-बार पल जाते हैं।
    आखिर किसकी शय पर देश में ऐसे गद्दार पल जाते हैं।

    फिर बनो कोई बापू पूरी करो इनकी जो तमन्ना है।
    खूब उत्तारों इनकी आरतियां ये नए जमाने के जिन्ना हैं।
    मुल्क के बंटवारे की जो खींची हमने लकीर ना होती।
    तो देश की आज ऐसी भयावह तस्वीर ना होती।।
    विनोद विद्रोही
    नागपुर
    #डिप्टीमुफ्ती #कश्मीर