• bepanaah_raaj 30w

    स्वतंत्र ,सार्थक जीवन जीने का निर्धारित किया है लक्ष्य, तो स्वावलम्बी होना ही होगा,
    मात्र इच्छा से बीजारोपण करके भी, उसे पल्लवित करने को, प्रयास तो करना ही होगा!
    यदि जीवन,स्वप्न और लक्ष्य भी सारे हमारे, तो क्यों कर कोई अन्य जीत परोस लायेगा,
    बिना छोड़े अवगुणों को, बाँधे अपने गुणों को, कोई किन्चित भी जीवन सुख न पायेगा!✍-राजकुमारी

    #hindiwriters
    #hindikavyasangam
    @shriradhey_apt,@vikram_sharma,@feelingsbywords,@kmeenutosh,@theshekharshukla,@smriti_mukht_iiha,@ashk_ankush,@panchdoot

    Read More

    स्वावलंबन

    स्वावलंबन से भला,
    जिसे लग जाये, लगन!
    नगण्य हैं उसके लिए,
    अन्तर्निहित अवगुन!!
    कष्ट-बहेलिया घात लगाये,
    प्रहार करे जब एकधुन!
    किन्तु उसे भ्रमित कर के,
    रख दे आगे बढ़ने की धुन!!
    पुनः यदि बाधाओं का जत्था,
    मुड़कर आये अहो,तो!
    वीरत्व किसके भीतर,
    नहीं पोषित, तुम कहो तो!!
    प्रेम-आच्छादित स्थल पर,
    प्रेम बन रहो सो रहो तो!
    किन्तु स्वयं पर आन पड़े तो,
    पावक बन बहो तो!!
    क्रंदन-क्रंदन-क्रंदन,
    क्यों कर हो इसका अभिनंदन!
    प्रत्येक दशा में सम्भव ही नहीं,
    विनम्रता का वंदन!!
    हठी उदधि को सीख देने,
    श्री राम ने भी, किया कोप-वरण!
    विभिन्नरत्न सुसज्जित पूर्ण-कुम्भ,
    का हो रहा व्यर्थ क्षरण!!
    किन्तु और नहीं, इस दशा में रहना,
    और नहीं, अब मुझे तो!
    स्वतंत्रतापूर्वक जीवनयापन को,
    आवश्यक है यही तो!!
    इतस्ततः व्यर्थ करने को,
    जीवन ये मिला नहीं तो!
    है अधिकार सबका,
    स्वतंत्र, सार्थक जीवन जीना ही तो!!

    ©bepanaah_raaj
    Instagram-@r_poeticworld