• msr_prose 15w

    दर्द की धुन

    पाश-पाश हुआ हूं तुझे रिझाने में मैं,
    मेरे ख़्वाबों के दस्तूर को ज़रा बुन के देखो।

    ये इमारतें बड़ा सताती है मुझे अपना अदब दिखा,
    इसकी दीवारों में तब्दील हुए पत्थरों को चुन के देखो।

    इश्क़ मरता रहता है इमरोज़ इन गलियों में,
    हैरत न हो चलते चलते यहां धब्बे फखत खून के देखो।

    यूहीं निकलता रहेगा ये कारवां बेहिसाब यहां,
    इसमें शामिल उन तमाम आहटों को गौरतलब हो सुन के देखो।

    दिल में कैद पड़े हैं इश्क़-ए-अल्फ़ाज़ कुछ यूं कि,आज उन्हें सुनो
    नहीं सिर्फ़ तसव्वुर करो, इन हवाओं में इस मिट्ठे दर्द की धुन को देखो।
    ©msr_prose