• vivek6563 6w

    काश मै परिंदा होता , तेरा घर मेरा भी घरौंदा होता
    मै रात भर जगकर तुझे सोता देखता
    फिर सुबह एक तिनका लाकर तेरे बालों से अंठखेलिया करता , तू ना उठती तब तो चोंच में पानी ला तेरी आंखे गीली करता ,
    तू गुस्से में मुझे मारने की कोशिश करती
    मै प्यार भरा नगमा पेश करता !

    जब तू सोती उसके साथ बिस्तर पर मै आंखे मूंद लेता , जब वो सो जाता कुछ वक़्त बाद
    मै तुमसे उसकी शिकायते सुनता ,

    माना कुछ दिन की ही होती ज़िंदगी मेरी
    जितनी भी होती सब तुम्हारे नाम करता !
    काश मै परिंदा होता !

    ©vivek6563