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    “तलाश”

    अरसों से उन “गीले आँखों”को “तलाश”है तेरी,ना जाने किस “अंधेरे” में गुम हो तुम,जहाँ तक हमारी नज़र अपना “सफ़र”तय नहीं कर पा रही-एक सोच ।