• durgeshkumar 30w

    मैं

    पानी से कब तक प्यास बुझाऊं
    मैं शोणित का प्यासा हूँ
    मरे हुए में जीवन ढूढूं
    मैं जीवन की प्रत्याशा हूँ
    हर शोषक का रुण्ड उड़ा दूँ
    कड़्ग कटारी सी अभिलाषा हूँ
    जुल्मों पर जो चुप ना बैठे
    उग्र कालरात्रि सी भाषा हूँ
    दुर्गेश कुमार सराठे