• rahul_varsatiy_parmar 23w

    इश्क़-ऐ-आगाज

    आज फिर मुझे तुमसे इश्क़ करना है
    ज़माने से फिर मुझे रश्क़ करना है,
    तुम्हारे हाथो जहर खाकर मुझे मरना है
    फिर इन इश्क़ की गलियों से गुजरना है,
    तुम्हारे साथ फिर वही लम्हा जिना है
    हर एक बात पर फिर तुमसे लड़ना है,
    आज फिर इश्क़-ऐ-आगाज करना है।

    RAHUL_VARSATIY_PARMAR
    Aka
    उर्फ़ निशार SER@PH

    ©rahul_varsatiy_parmar