• shreyakanodia 22w

    अपने तन का चादर गँवा कर
    तेरे दर पे चादर चढ़ाने आई हूँ,
    शर्म तेरे बंदों में बची नहीं,
    मैं अपनी आँखें मूँदने आई हूँ।

    ©shreyakanodia