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    ये जीवन तभी संभव है

    ज्ञान अपनी जगह
    जिसमे कहना सुनना समझना जागना जगाना शामिल है

    ध्यान अपनी जगह
    जिसमे अनुभव और अपने अनुभव की ही काट शामिल है

    जीवन अपनी जगह
    नेत्रहीन की तरह जीवनगलियों में टटोल सिर्फ जीना होता है

    सभी का सार एक ही
    जड़ तक पहुंचना, बीज बन जाना, अस्तित्व से जुड़ जाना है

    कुछ भी #होने का भाव
    न जीने देगा न ध्यान में बैठने देगा न ज्ञान में स्थिर रहने देगा

    ये जीवन तभी संभव है