• monikakapur 5w

    अंत करने दानवों का
    नारी में चण्डी चाहिए
    आज जीने के लिए
    इक शिखण्डी चाहिए

    ना हो चौसर का पासा
    ना वस्तु तुम निर्जीव हो
    हार दी जाए जो यूँ ही?
    जागो, तुम निर्भीक हो
    बिकती हो जहां शीलता
    ना ऐसी मंडी चाहिए
    आज जीने के लिए
    इक शिखण्डी चाहिए


    लांघ लो रेखाएँ अब सब
    रावणों से ना डरो
    शक्ति हो, अग्नि हो तुम
    नाम को पूरक करो
    धर लो साहस,बल पताका
    हाथ जय की झंडी चाहिए
    आज जीने के लिए
    इक शिखण्डी चाहिए


    अब ना केशव आएँगे
    तेरी रक्षा के लिए
    युग के युग बीते हैं यूँ ही
    अधरों को अपने सिए
    गर्व से प्रज्वलित हो
    वो लौ अखंडी चाहिए
    आज जीने के लिए
    इक शिखण्डी चाहिए



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