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    हवा ए रुख के अंचल मे कभी,
    हम खुद को उड़ाना सिख लेंगे,
    माना की बच्चे है अभी इस दौर मे,
    हम दौड़ने का बहाना ढूंढ लेंगे,


    खैर इस बात से आ जाती है खुशी,
    कल के लिए अपना नया ज़माना ढूंढ लेंगे,
    लब सुर्ख, ऑंखें नशीली, बस कुछ अंदाज़,
    ए वक्त लबों पर वह प्यारी सी मुस्कान सिख लेंगे,


    चलते चलते वह बचपना वाला अंदाज़ ए हवा,
    उसी पल का नज़राना ढूंढ लेंगे,
    मालूमात है तूफ़ान से टकराना खतरा है,
    हम उसी तूफ़ान मे जीने का बहाना ढूंढ लेंगे,


    हर्फ़ कच्चे है अभी अपने थोड़ा सब्र कीजिये,
    धार करने वाले अल्फ़ाज़ों का वह इशारा ढूंढ लेंगे,
    माना की ज़िन्दगी आज़माती है बहुत,
    ज़िन्दगी छोड़ कर अपना ज़माना ढूंढ लेंगे,

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    सिख -लेंगे

    अदब ए आईना सिख लेंगे ,
    बुरे हालातों पर भी मुस्कुराना सिख लेंगे,