• rustling_sprouts 37w

    And today I dreamt you in my nap , that crafted this poem perhaps!

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    सौदा किया था दिल के साथ की तुम्हें याद नहीं करूंगी
    खुली आंखों में आने से रोक लिया तुम्हें , ये क्या रिवाज हुआ की अब सपने में आ कर बेचैन कर देते हो तुम,
    होंठों पर रोका तो आंखों में चले आए तुम
    छोड क्यूं नहीं देते मुझे?
    यूं बार बार मुझे छूते हो क्यूं?
    किसी को तड़पाना अच्छा नहीं होता
    दर्द में रूल्साना अच्छा नहीं लगता
    तुम्हारा यूं चले आना हमारे टूटे रिश्ते को शोभा नहीं देता.

    ©unfeigned_emotions