• nks_thoughts 30w

    ☺ मां कलम है, दवात है, स्याही है
    मां परमात्मा की स्वयं की गवाही है।
    मां त्याग है, तपस्या है, सेवा है
    मां फूंक से ठंडा किया हुआ कलेवा है।
    मां चूड़ी वाले हाथों के मजबूत कंधों का नाम है
    मां काशी है, काबा है और चारों धाम है।
    मां चिंता है, याद है, हिचकी है
    मां बच्चे की चोट पर सिसकी है।
    मां चूल्हा-धुआं-रोटी और हाथों का छाला है
    मां जिंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है।
    ...तो मां की कथा अनादि है, अध्याय नहीं है
    और मां का जीवन में कोई पर्याय नहीं है,
    मां का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता
    और मां जैसा दुनिया में कोई हो नहीं सकता।
    .....क्या बताएं कि मां क्या है।