• aditeekapeesh 23w

    कलम में डूबे होने के फिर
    हरपल एहसास तलाशती हूँ।
    गुम हुए पिछले कुछ दिनों से
    भीतर अपने अल्फ़ाज़ तलाशती हूँ।

    सिर्फ छू लेने भर से
    खुदबखुद चलने वाली कलम
    न जाने उदास है क्यों...
    क्या रूठी हुई है मुझसे किसी बात पर आजकल??
    जीना मुश्किल हो चला है कलाविहीन....
    इस तरह शामिल हूँ प्रत्यक्ष में मैं आजकल।
    ©aditeekapeesh