• kalpaa 34w

    सोच

    समाज गंदा है ••••
    समाज गंदा है ••••
    ये जो तुम चिल्लाते हो
    सोच तुम्हारा कितना साफ है
    ये भी क्या कभी सोचते हो ???

    जब गुजरती है कौई लड़की सामने से
    जो उसे "माल" कहके पूकारते हो
    तब अपने गंदे सोच को फेंकने केलिए
    समाजको ही कुडेदान बनाते हो
    फिर समाजको गंदा कहते हो ।।

    जब फिल्मो में आइटम नंबर देकर
    फिल्मो को हिट कराने का एक तरिका बताते हो
    तब तुम जिती जागती लडकी को
    बेचने के सामान बनाते हो
    और इस गंदे सोच को बेचने केलिए
    तुम समाजको ही चुनते हो
    फिर समाजको गंदा कहते हो ।।

    और आंटी लोग आप क्या करते हो
    आप लोगों के सामने कोई लड़की छेड़े
    तो उलटा आप उस लडकी की गलती गिनते हो
    उसके कपडे से लेकर चालढाल तक
    उसकी कमियां निकालते हो
    और उस गंदे सोच को समाज में ही संरक्षण देते हो
    फिर समाजको गंदा कहते हो ।।

    और घरपे क्या करते हो
    आंसू पी जाना बेटी को सिखाते हो
    पर बहु बेटी के आंखो में कभी आंसू ही न दें
    ये कभी बेटे को नहीं सिखा पाते
    बेटी को बेटे से हमेशा कम ही आंकते है
    इसी गंदे सोच को पिढीयों के साथ आगे बढाते हो
    फिर समाजको गंदा कहते हो ।।

    बेटे की शादी में
    बहु को दहेज में तोलते हो
    बेटी की शादी में भी
    दामाद की कीमत तय करते हो
    दहेज में कुछ कमी रह जाता है तो
    तो बहु बेटी की जीना दुस्वार कर देते हो
    इसी गंदे सोच को प्रथा के नाम देकर समाज मे पनपने देते हो
    फिर समाजको गंदा कहते हो ।।
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    ये जो समाज के बात करते हो
    कभी सोचे हो
    ये समाज बनता कैसा है ???
    हम तुम को लेकर ही समाज बनता है ।
    और कुछ गंदे सोच के कारण ही ये समाज गंदा हो जाता है
    गंदा है गंदा है कहने से गंदगी नहीं हटेगी । हमे उसे खुद साफ करना पडेगा । सायद तब जाके कानुन का भी कोइ मतलब होगा

    ©kalpaa