• _rajat_ 24w

    मेरे बाद।

    जैसे चाँद नज़र आता है आफ़ताब के बाद
    शायद उनका भी आना हो मिरे जाने के बाद।

    ऐसे बंद कर डाला मैंने, यादों के कमरों को
    कि भूला याद उनको करना, याद आने के बाद।

    ताउम्र सताती रही हमें ये हाल-ए-तिश्नगी
    सहरा भी मिला हमको प्यास मर जाने के बाद।

    लैला-मजनू, हीर-रांझा, सोनी-महिवाल, ठीक है!
    पर अपना भी इक फ़साना है, सब फ़सानों के बाद।

    बेशक ज़माना तुम्हें तमाम ऐशो आराम देगा
    बताना आशिक़ मिले जो मुझसा, मिरे जाने के बाद।

    ढूंढ लेना तुम मुझे कुछ गज़ दफ़्न ज़मीन में
    फक़त जब याद आएगी मिरी ज़माने के बाद।

    यूँ अश्क़ बहाना मौत पे मुनासिब नहीं लगता
    कि जिंदा होना है अभी तो, ख़ाक हो जाने के बाद।
    ~रजत
    ©_rajat_