• dil_ne_kuch_to_kha 5w

    हर शाम आसमां से नज़र मिलती है
    फिर नजरों में कयामत घुलती है

    सिलसिला ये राहत का चलता ही रहता है
    मेरे जहन में अब भी कोई रहता है

    वहीं छोर हसीन कल्पनाओं का दौर
    आहिस्ता-आहिस्ता चलती हवाओ का शौर

    पुकार रही है कोई रूह मुझे पुरजोर
    फ़िर कैसे बंध जायें कोई टूटी डोर

    अनुभवों की पगडंडी पर रोज सफ़र होता है
    जो बेहद प्यारा है वो दरिया की लहर होता है

    डूबते हुयें सूरज ने अलविदा कह दिया
    हाय ये किस शख्स को खुदा कह दिया

    @saurabh