• kishore_nagpal 22w

    वारी जावां सदगुरु दे
    जो इन्ना प्रेम लुटाये।
    हर पल मेरी बांह पकड़ के
    मैनूं पार लंघाये।

    ओखी घड़ी कदी ना टिक्की
    जेव्हा सदगुरु मेरे नाल
    शीर्ष झुका लौ, आशीषा पा लौ
    मेरा सदगुरु दीनदयाल।

    सौं रब दी मेरे सदगुरु जी
    त्वाडे नाल ही मेरी स्वांसा है
    त्वाडे सिवा ना कुछ वी जग विच
    अइयो मेरी आंखा है।
    ©kishore_nagpal