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    �� नमस्ते, इस रचना के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि, ज़िंदगी देने का नाम है। अगर आप चाहे कितनी भी दौलत कमा लो पर मृत्यु से वह आपको बचा नही सकती। ना ही मृत्यु के बाद आप उसके हकदार रहेंगे।

    ��इसलिए जीवन मे कर्म को एहमियत दो और नाम कमाने की कोशिश करो क्यूंकि, अगर आपने नाम कमाया तो आपके मृत्यु के बाद भी लोग आपको याद करेंगे। @gatisheel_sadhak_bihari

    �� ०३-०७-२०१८ �� २०:५३ #trickypost

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    हिसाब ज़िंदगी का

    कुछ जोड़ा तो कुछ घटाया, जाकर समझा हमने ज़िंदगी तुझसे हमने कुछ ना पाया।

    बचपन मेरा + यौवन मेरा - उसपर यह जालिम जिम्मेदारी = मौत पर आकर खत्म हुई मेरी कहानी।

    देखकर इस फॉर्मूले को दिल फिर मेरा घबराया, सोचा देखूं बदलकर शायद हमने कुछ तो होगा पाया।

    बचपन की हँसी + यौवन की मस्ती - पर उसपर फिर यह जालिम जिम्मेदारी = मौत के बाद सब धरा रह गया और खत्म हुई मेरी कहानी।

    अब तो मानो मैं होकर भी मैं ना रहा,
    निःशब्द होकर मैं अपने मैं को देखता रहा,
    शून्य पाकर अपने अश्रुओं को पोछता रहा,
    बस एक पल बाद मेरी तृष्णा ने उम्मीद जगा दी,
    सोचा थोडी अक्ल लगाकर देखूँ,
    शायद हमने कुछ तो होगा पाया।

    बचपन की चोरी + यौवन में छोरी + उसपर यह ठोंग जिम्मेदारियों का = मेरे किसी काम ना आया,
    मरता ना तो क्या करता,
    जीते जी हमनें कुछ ना पाया।
    ©trickypost