• khusi_the_happiness 23w

    खामोशी

    ....तन्हाई जो चुभती थी अब तक... आज अचानक उसने मुझ से बातें सुरु कर दी।

    .....न जाने क्या देखा उस ने मुझ में कि मुस्कुराने वो लगी और फिर एक दिन अचानक तोड़ खामोशियाँ वो मुझ से खुसफुसाने लगी....

    .....धीरे से वो अपने खामोश राज़ खोलने लगी....बोली मुझ से वो कि "अरसे से देख रही थी वो मुझे खामोशी में खामोश बैठे हुए । खामोश थी ज़ुबां पर देखा उस ने मुझ में अनगिनत लहरों का अनजान । सोचती रही वो कि खामोश लहरें आती है मुझ से मिलने या बिछुड़ती है मुझ से हमेशा के लिए।

    .....कश्मकश है दिल में कि खामोशी के साथ अकेलापन है साथ मेरे या किसी भीड़ को छोड़ आई हूँ मैं पीछे।

    ......बस इसी बात को पुछने खामोशी ने तोड़ी खामोशियाँ और वो मुझ से बोल पड़ी क्योंकी अकेलेपन का खामोशी से है रिश्ता गहरा और आज खामोशियों ने खो दिया है अकेलापन अपना जब से पाया है उस ने संग मेरी बेचैन रहस्यमयी खामोशियों का।

    ......वो भी खामोश थी, मैं भी उसे खामोश दिखी पर अब हम में खामोश बातें होने लगी।उस की खोज थी खोया अकेलापन, पर मेरी खोज का अब तक कोई सिरा मिला नही।

    ......हम दोनों की खोज खामोशियों के समंदर में गोते खाने लगी।लहरों के आने जाने की आवाजें खामोशियों को मिटाने लगी और खामोशी मेरी सहेली मेरी खामोशियों से खामोश हो के बतियाने लगी।

    ......तन्हाई के आलम में अकेलेपन की खोज ने खामोशी को भी खामोश न रहने दिया।खामोशी ने बातें कर के खामोश आलम ही बदल दिया......

    "Aussi thoughts"
    ©khusi_the_happiness
    4 july 2018
    1.00 am