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    हृदय हृदय की बात क्या जाने
    बातें अनेक अजीब हैं
    धम्न‌ीयाँ नहीं केवल निर्माणदाता
    दुख - सुख द्वेष असीम हैं।

    परन्तु कुंठित है मानुज - मानुज
    क्योंकि दुख की राह पे चलता है
    सुख के रंगों से हो वंचित
    दुख के रंगों में पलता है।।
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