• pagal2 5w

    " कर्मों " ki आवाज़

    शब्दों se ऊंची होती हैं...

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    अधर्म में भी कहीं धर्म था

    जब कौरवों ke संग कर्ण था

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    सब नजरिये ki बात हैं ... साहब

    कर्ण se कोई पूछे.. दुर्योधन कैसा था

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    वाकीफ तो रावण भी था.. अपने अंजाम se

    मगर ज़िद थीें उसकी..

    अपने अंदाज में जीने ki

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    जिंदगी किस्मत se चलती हैं

    दिमाग़ se चलती तो... बीरबल बादशाह होता