• urvashi_s 30w

    बचपन

    ये बचपन न छीनो इनसे,
    दुबारा लौट कर न आएगा।
    जवानी के तले,
    सबको दबना है एक दिन।
    अभी से क्यों दबाना है!
    थोड़ा खुल के जी लेने दो
    इन्हें यह पल;
    यह समय को लौटकर
    फिर थोड़ी आना है।

    इनकी नन्ही किलकारियों से,
    आँगन गूंज उठने दो।
    इनकी मधुर बोल से,
    दिल प्रफुल्लित होने दो।
    उल्लास है इनके जीवन में,
    अभी इन्हें न खोने दो।

    एक मीठा सा सपना है ये बचपन।
    न लगाओ इसमें कोई बंधन।
    जी लेने दो इन्हें इस सपने को।
    अगर यह सपना टूट गया,
    तो फिर कभी न वापस आएगा।
    और यह बचपन,
    अधूरा रह जाएगा।
    ©urvashi_s