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    165 अधिकारी

    पाली तू मक्कार है मक्कारी तेरा काम
    दूसरों को तंग करे अधिकारी तेरा नाम
    दूसरों के कष्ट को तुमने क्यों है सहना
    तेरा लिए उचित है अपनी ज़िद्द में रहना

    अमृत पाल सिंह 'पाली'