• thelifeofsufi1 10w

    कैसे लेकर निकलूं मैं کیسے لےکر نکلوں میں
    इस वक़्त में मशाल اس وقت میں مشعل

    तन पर है एक ही कपड़ा تن پر ہے ایک ہی کپڑا
    मैं जलाऊं किसको میں جلاوں کسکو

    मैं कोई मंत्री नहीं, میں کوئی منتری نہیں
    ना ही कोई पत्तलकार हूंँ نا ہی کوئی پتل کار ہوں

    बना मशाल चिताओं से بنا مشعل چتاؤں سے
    दिखाऊं किसको دکھاؤں کسکو

    मेरी ज़ुबां जो खुले میری زبان جو کھولے
    दौड़ो तराशने को तुम دوڑو تراشنے کو تم

    आह ओ ग़म सुनाना آہ و غم سنانا
    चाहूं सुनाऊं किसको چا ہوں سناؤں کسکو

    नंगे पैर भूखे पेट हैं ننگے پیئر بھوکھے پیٹ ہیں
    हज़ारों कोस चले ہزاروں کوس چلے

    पहुंचीं घर अनगिनत پہونچیں گھر انگینت
    लाशें गिनाऊं किसको لاشیں گنا وں کسکو

    जो सर झुकाए खड़े हैं। جو سر جھکائے کھڑے ہیں
    हैं उनके सर आबाद ہیں انکے سر آباد

    ज़मीर होती क्या है चीज़ ضمیر ہوتی کیا ہے چیز
    बताऊं किसको بتاؤں کسکو

    अस्मतों को लुटते फिरते हैं عصمتوں کو لوٹتے پھرتے ہیں
    वर्दी में मुहाफ़िज़ وردی میں محافظ

    तहरीर चाक अस्मतों की تحریر چاک عصمتوں کی
    लिखाऊं किसको لکھاؤں کسکو

    ©sufi