• megs0808 23w

    किस्से-कहानियां कितने ही पढ़ा किए हम, कितने ही फलसफे भी सुना किए ,
    रंग बदलते चेहरों की पहचान का अंदाज़ कभी न हमें आया,

    आला दर्ज़े के तालीमी समझा करते थे खुद को कभी हम भी ,
    इम्तिहान ज़िन्दगी ने जब लेना शुरू किए इक दिन,
    अल्लाह कसम , एक भी किताबी सबक फिर काम ना आया ।।
    - मेघा