• the_precious_platinum 23w

    यहीं कुछ दो महीनों का साथ था....
    पर लगता है मानो दो जनम लगेंगे तुझे भुलाने में।।

    उस सर्द सुबह की धूप को...
    बारिशों की साँझ बनाने में।।
    किसी टूटे हुए तारे की
    मुक्कमल ख्वाहिश-सी थी उसे चाहत हमसे...
    फरिश्तों की दुआ में भी शामिल हो जाए
    ऐसी थी मुख्तसर मुलाकात तुमसे।।

    वक़्त लगेगा तेरे हिस्से की ज़िंदगी खुद जी जाने में
    शायद दो जनम लगेंगे फिरसे तुझे भुलाने में।।

    ~प्राची