• arshadarshu 22w

    उम्मीद

    रात के सन्नाटे जब थक कर सो जाते हैं,
    सियह गलियों में मेरी निगाह राहें तकती है।
    ख़ुश्क होते होते स्याही पन्ना सुर्ख कर जाती है,
    मगरूर है तेरी यादें बहुत,अंधेरे में उजाला कर जाती है।
    -अर्श
    ©arshadarshu