• goldenwrites_jakir 10w

    #umeed52 अजनबी

    जिसे कभी देखा भी नहीं - जिसे कभी महसूस किया भी नहीं वो अंजाना अजनबी कब कैसे जिंदगी बन गया
    बस इक फोन कॉल से इक नय रिश्ते की शुरुआत हुई ,,,

    बात उन दिनों की है ज़ब मेरी फ्रेंड उनकी मौसी के घर गई
    और बहा से मुझे फोन लगाकर हाल चाल पूछा और कहा मेरी मोशी की लड़की से बात करो मेने भी ना ना करते करते उनसे बातें की ----- फिर क्या था इक अनजान मुलाक़ात से कब दो दिल इक जान हो गए ,,,,,

    बातो बातों के सिलसिले मे दोस्ती फिर मोहब्बत फिर आशिक़ी हो गई -----

    फिर सिलसिला पहली मुलाक़ात का अनजान शहर से सुरु गांव की गलियों तक जा पोहचा
    वो पहली मुलाक़ात वो बस का सफर मंदिर की सीढ़ियां वो पूजा की थाली कब हाथो मे हाथ हम दोनों का वो सफर सुहाना जिंदगी खूबसूरत एहसास दिल को हुआ
    दो साल कैसे बीत गए चाहत की बारिसों मे वो सफर यादों का इक जहां हमारा बन गया ,,,,,,

    महीनों मे होती हमारी इक दो मुलाक़ाते फोन पर मीठी मीठी तकरारें दो दिलो को जोड़ती बातों बातों की वो मुलाक़ाते इक कहानी प्यार की हम लिखें जा रहे थे जिंदगी मे
    हम अनजान अजनबी इक दूसरे मे समाने लगे
    भुल कर दुनियां को हम इक होने लगे ,,,,,,,,,

    फिर खेल खेला तक़दीर ने हम फिर अजनबी हो गए
    दो दिल रस्मो के धागो मे उलझ कर बिखर गए
    साथ फेरो की उनकी कसम ने हमें अजनबी बना दिया
    थे रास्ते हमारे एक उसे कई हिस्सों मे बाट दिया
    होकर हम एक --- एक ना हुए
    आज बीत गए 10 साल हमें जुदा हुए वो रास्ते प्यार के हमें भुल गए
    यादों मे बस पुरानी तस्वीर है आँखों मे बस बरसात है
    दिल मे दुआ इबादत मे इंतजार यही जिंदगी की अधूरी कहानी हम अजनबी अजनबी रह गए ....।।


    ©goldenwrites_jakir