• romapathak 23w

    सदियाँ

    आओ , ज़रा तुम सुकून से औऱ सदियों से मुलाक़ात करना,
    हाँ पर एक शर्त हैं छोटी सी , कि तुम मेरी रूह से बात करना,
    जिस्मानी लहरे शांत हो जाती हैं अक्सर , अचानक उठकर,
    पर तुम अहसासों की धारा बनकर, मेरे इश्क़ के समुंदर में उतरना।


    तेज़ बारिश पसंद नहीं मुझे , तुम फुहारों की तरह मुझ पर
    बरसना,
    ठंडी हवाओं की महसूस होती सिहरन सी, तुम मेरे जिस्म पर ठहरना,
    कितनी ही बेबाकियाँ होती हैं लोगो के इश्क में, औऱ फिर थम भी जाती हैं,
    जो कभी ना बीते वक़्त के साथ , तुम ऐसी सदियों सी वफ़ा करना।



    हयात
    ©romapathak