• ankahi_baatein_teri_meri 6w

    न जाने क्या मायने
    तय किये हैं खूबसूरती के
    जमाने ने
    मेरे लिए तो तेरा हर एक रूप
    दिलनशीं है,

    मैं अब भी चाहती हूँ
    तेरे बालों में उंगलियां घुमाना,
    तेरी चुप सी आँखों को
    पढ़ते रहना
    तेरी हथेलियों को चूमना,
    तेरी गोद मे सर रखकर
    सुनते रहना तेरी
    बेमतलब की बातें
    और सो जाना,

    मैं तब भी चाहूँगी ये सब
    जब उम्र के पड़ाव पार कर,
    हम दोनों बैठे होंगे
    किसी बगीचे में
    देखेंगे
    नन्हें बच्चों का झूले झूलना
    सूरज का निकलना,
    शाम से रात होना,
    चिड़ियों का चहचहाना,
    और हौले से मुस्कुराकर
    मैं रख दूँगी
    तुम्हारे काँधे पर सर,
    और तुम थाम लोगे
    वो झुर्रियों वाला हाथ मेरा।
    ©ankahi_baatein_teri_meri