• _palakagr_01 9w

    जीवन में ना जाने ये कैसा परिवर्तन अब आया है
    मिटते रिश्तों की छवियों ने मन को वीरान बनाया है
    कभी ना सोचा था जो हमने कैसा आज नज़ारा है
    सब अपने और परायों ने सीने में खंजर मारा है
    पहले तो दर्द भी होता था उसका भी अब नाम नहीं
    कितनी भी हम कोशिश कर लें पर मिलता आराम नहीं
    किस्मत के इस खेल में हमने जब भी दाँव लगाए है
    बुरी तरह हर बाज़ी हारे कुछ ऐसे पासे आए हैं
    इस खेल में देखेंगे आगे अब क्या क्या किस्सा होता है
    सच को कोई पहचान मिलेगी या झूठ महल में सोता है
    ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️