• khwab_aur_tum 31w

    बैचनी है कि ...मंजिल तक अभी पहुँचा नहीँ हूँ मैं...
    और सुकून भी है...कि अब तक रुका नहीँ हूँ मैं...
    ©khwab_aur_tum