• kapil_goyal 29w

    हां मैं अब बदल गया हूं,
    क्योंकि मै अब संभल गया हूं।
    कर लेता था भरोसा किसी पर भी आसानी से,
    अब लेता हूं हर कदम मैं बड़ी सावधानी से।
    जिसे हर कोई था पढ़ लेता मै था एक खुली किताब,
    जो किसी जगह ना मिले अब हूं मैं वो जवाब।
    खुश हुआ करता था मैं दिल से ना कि सिर्फ चेहरे से,
    अब जख्म है दिल में कई मेरे कुछ गहरे से।
    ना जाने क्या जादू था तेरा जो मुझपे चल गया,
    थोड़ा रोया थोड़ा टूटा पर मैं अब संभल गया।


    ©kapil_goyal